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सुबह शिखर पर लगेगा नया ध्वज, शाम को निकलेगी बाबा महाकाल की राजसी सवारी; विजयादशमी पर उज्जैन सराबोर होगा भक्ति में!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
विजया दशमी के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष भी आस्था और परंपरा से जुड़े दो बड़े आयोजन होंगे। सुबह मंदिर के मुख्य शिखर पर नई ध्वजा फहराई जाएगी, वहीं शाम को बाबा महाकाल अपनी राजसी सवारी के साथ नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
सुबह शिखर पर ध्वजा पूजन
प्रतिवर्ष दशहरा पर्व पर महाकाल मंदिर शिखर पर ध्वजा बदलने की परंपरा है। इस अवसर पर श्री पंचायती महा निर्वाणी अखाड़ा द्वारा ध्वजा का पूजन किया जाएगा। पूजा सामग्री, नई ध्वजा, रस्सी और बांस की व्यवस्था तहसील कार्यालय द्वारा की जाती है। सुबह की आरती के बाद नई ध्वजा विधि-विधान से शिखर पर चढ़ाई जाएगी। यह परंपरा आस्था का प्रतीक मानी जाती है और मान्यता है कि नई ध्वजा फहरने से पूरे नगर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
शाम को निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी
दोपहर 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर सभा मंडप में पूजन-अर्चन के बाद बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकलेगी। इस सवारी में भगवान महाकाल मां महेश के रूप में चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर जाएंगे। मंदिर परिसर से बाहर निकलते ही सशस्त्र पुलिस बल उन्हें सलामी देगा।
दशहरा मैदान तक 19 किलोमीटर का भ्रमण
सवारी नए शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए लगभग 19 किलोमीटर की दूरी तय कर दशहरा मैदान पहुंचेगी। यहां रावण दहन से पूर्व बाबा महाकाल का विशेष पूजन और शमी वृक्ष पूजन संपन्न होगा। इसके बाद सवारी पुनः मंदिर के लिए रवाना होगी।
इस भव्य शोभायात्रा में पुलिस बैंड, घुड़सवार दल, सशस्त्र बल, मंदिर के पुजारी, अधिकारी-कर्मचारी और हजारों भक्त शामिल होंगे। नगर की सड़कों पर चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष गूंजेंगे। मान्यता है कि दशहरे के दिन बाबा महाकाल अपनी प्रजा को आशीर्वाद देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं और उनके दर्शन से हर प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं।
विजया दशमी के इस विशेष अवसर पर उज्जैन का पूरा वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर रहेगा। सुबह शिखर पर नई ध्वजा का आरोहण और शाम को बाबा की भव्य सवारी – दोनों आयोजन एक ही दिन परंपरा, विश्वास और धर्म की अमिट छाप छोड़ते हैं।